कुछ खट्टे मिट्ठे एहसासों के साथ आज वकालत के एक साल पुरे,
सोच में आमूल तो नहीं पर कुछ परिवर्तन तो हुए है,
अनुभवों की सौगात मिली है ,
हकीकत से पहचान बढ़ी है,
जिंदगी में बात कुछ खास बनी है,,,,
(किशोर कुणाल )
मै आसमान को छुना नहीं चाहता बस एक बार उड़ना चाहता हूँ उन्मुक्त होकर अपने बलबुते पर अपनी शर्तो पर एक बार अपनी शक्ति तो देख लूं !!!