सोमवार, 31 अक्टूबर 2011


""""किसी का दुखः कितनों का तमाशा बन जाता हैं

अपना सर्वश लुटने के बाद भी उपर सेगाल पर तमाचा लगा जाता है

कितने नंगी आँखे नंगा बना देती है

भरे बजार बजारू बना करछोङती है।""""

( किशोर कुणाल )

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

"""मेरी कलपनाओं का सागर सिमट जाता है कागज के चन्द चिथरों में ।


सारी कहानी बयाँ हो जाती है बस चन्द शब्दों में


भावनाओं की उबाल कैद हो जाती है एक कविता में


पता नहीं क्यों कोई दिल की छोटी सी बात नही समझ पाता नजरों की एक टकराहट में।"""

(किशोर कुणाल)

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

मानव मन

गजब है अजब है,
कुछ तो सोच के परे है,
आकार है निराकार है,
गलत है सही है,
सत्य है असत्य है,
पाप है पूण्य है,

जहाँ देखो वहाँ कई मापदण्ड है,
बेचारा मानस जाये कहाँ,
अपनी शिकायत सुनाये कहाँ,
जिसको मानता है वह तो खुद पत्थर का बन बैठा है,
जिसके अस्तिवत्व पर ही सवाल उठते है,
एक तरफ सामाज और कानून ,
जिसके पास सिर्फ दण्ड का विधान,
और दूसरी तरफ धर्म और विशवास,
जो भय, विशवास, सिद्धांत ,परमपराओं पर, निर्धारण करता है,
मानव मन बहुत फेर मे पङा,
गलत सही के चक्कर में पङा,
जरूरत और सही गलत में फसा......

(किशोर कुणाल)

शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

""""कितने तालो का अस्तित्व सिमट जाता है नदियों में,

चन्द नदियाँ अपना सर्वश खो बैठती है सागर में,

बेचारा एक सागर कितने सैलावो को लिए जिन्दा है तुम्हारी आँखों में"""""


(किशोर कुणाल)

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

नटखट

मै थोङा क्रोधी हूँ,
जन्म जात विद्रोही हूँ,
दिल से एक क्रान्तिकारी हूँ,
भला एक मानुष हूँ,
जद्दी बङा यथेच्छाचारी हूँ,
सागर में छुपा अनमोल मोती हँू
अभीमानी नहीं स्वाभीमानी हूँ,
सभल कर थोङा रहीयेगा मुझसे
.
..
...
शैतान नहीं नटखट थोङा अधिक हूँ ।

( किशोर कुणाल )

रविवार, 9 अक्टूबर 2011

मेरी खुशी

मैं बहुत खोजता हूँ,
हर तरफ खोजता हँू ,
दसो दिशाओ में ,
अपनो मे परायों में ,
परिचितों में अपरिचितो में ,
यत्र ,तत्र, सवत्र,
हर सम्भव प्रयास करता हूँ,
अब तो समझौता करना भी सिख लिया हूँ ,
उसके जरूरतों के अनुसार चलता हूँ ,
फिर भी नहीं मिलती,
पता नही क्यों ?.
..
...
सफलता भरी मेरी एक खुशी ........................

शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

50 के बाद भी लङता हँू

सारी उम्र लगा दी बस एक पहचान के खातीर,

बच्चो के सर पर एक छत के खातीर,

हर समझौता सिर्फ अपनो के खातीर,

क्या करता,

आज तक आसानी से कुछ मिला नहीं,

घंटो के सघंर्षो के बाद भी पल भर के सुख का ठिकाना नहीं,

बच्चो की आँखो में अपनी खुशी खोजता हूँ,

उनके भविषय के खातीर 50 के बाद भी लङता हूँ,

(किशोर कुणाल)