शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

50 के बाद भी लङता हँू

सारी उम्र लगा दी बस एक पहचान के खातीर,

बच्चो के सर पर एक छत के खातीर,

हर समझौता सिर्फ अपनो के खातीर,

क्या करता,

आज तक आसानी से कुछ मिला नहीं,

घंटो के सघंर्षो के बाद भी पल भर के सुख का ठिकाना नहीं,

बच्चो की आँखो में अपनी खुशी खोजता हूँ,

उनके भविषय के खातीर 50 के बाद भी लङता हूँ,

(किशोर कुणाल)

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