बुधवार, 31 अगस्त 2011

मित्र

कृष्ण और सुदामा के संबध पर जब विचार किया,


सच कहता हूँ मित्र तुम्हारा ही ध्यान किया,नीति


निर्धारण में मैने तुम्हारा साथ पाया,


तन धन से उपर मन का मिलाप पाया,


मित्र हमारे मध्य,


मत भेद तो आया,


लेकिन मन का भेद कभी नहीं आया,


कलयुग में हम भाई जैसा संबध रखते है,


रक्त संबध से सर्वोच्य िवश्वास को स्थान देते है,


मित्र सुख और दुख में हम तुमही को याद करते है,


विश्वास है मुझे,

इस विश्वास के पवित्र बंधन का तुम ख्याल रखोगें,

इस मित्रता के संबध को बहुत ईमानदारी के साथ आगे भी निभाओगें ।
(िकशोर कुणाल)

संस्कारो की नीव

""""आज हमारे संस्कारो की नीव  कमजोर होती जा रही है,
तन पर कपङो के साथ लज्जा कम होती जा रही है,
आज टी. वी देखते समय  बाबु जी के सामने नजर नीची नहीं होती,
गलती से भी चैनल चंेज नहीं होती""""

(िकशोर कुणाल)

सपने के वास्ते

ठान लिया है मैनें सिकंदर की तरह जीने को,

सपने के वास्ते हर संग्राम लड़ने को,

हवन कुण्ड की अग्िन,

अब मुझसे आहुति माँगती है,

इस कलयुग में अश्वमेघ यञ चाहती है,

रक्तपात की इक्छा नहीं,

बस दिलों पर अधिकार चाहिए ,

लोकतंत्र के इस युग मे कलम की तलवार चाहिए,


मेरी कलम की वार बड़ी अनोखी है,


काया पर नहीं आत्मा पर वार करती है,


इतनी स्वाधीन है इतनी शक्ितशाली है,


जो अधिकार पाना और दिलाना भी जानती हैं!

(िकशोर कुणाल)

सोमवार, 29 अगस्त 2011

जन्म दिवस

आज दिवस बहुत खास है जीवन में बहुत उल्लास है


हर तरफ सुन्दर जिन्दगी की बहार है


एक चन्चल जिन्दगी समीप आ कहती है मुझसे

""जन्मदिवस की ढेरों शुभकामनाएँ कुणाल जी""आपका जन्मदिन आज है

यह सून मेरे चेहरे की रौनक आ गई,

उसकी आँखों मे अपनी अहमीयत देख मुझमे मे आत्म विश्वास आ गई

भादों में सावन की मस्ती छा गई।""

( किशोर कुणाल )

शनिवार, 27 अगस्त 2011

अकेला

चलता हूँ अकेला

सीने में आग ले कर

खुद को ,कोध की ज्वाला में तपाकर

दिशा  हीन दिखता  हूँ

ठोकर खा करके

भी आसंमा को देखता हँू

अपने को आजमाना चाहता हूँ

वख्त का साथ खोजता हँू

भविष्य  के लिए  आज से संघर्ष करता हूँ


बस मौके की तलाश है जानता हूँ मिलेगा


मेरा वखत् भी आएगा

हँसने दो दुनिया  को ऐसा कुछ कर जाँउगा

ईश्या से उनका सीना  जला जाँउगा

फिर देखूगा फिर   दिखाउँगा    

जीत के जशन  में डूब जाउँगा

दुनिया  को एक राह दिखाउँगा

अकेला ही चला जाँउगा
अकेला ही चला जाँउगा

(किशोर कुणाल)

मैं

मैं कोई शीशा नही

जो जरा सा चोट लगी और बिखर गए

मैं कोई बादल भी नहीं

जिसकी हवा के रूख से मंजिल तय हो

मैं कोई पत्थर नहीं

जिसे हर नदी भेद डाले

मैं कोई चाँद नहीं

जिसकी जिंदगी किस्तो मे हो

मैं वह िहमालय हँू

जो अपनी पूरी बुंलदी पर है


मै वह नदी हँू

जिसे मंजिल की चिन्ता नही

मै वह सागर हँू

जिसकी सीमा का आकलन नहीं

मै वह सूरज हूँ जो अपनी ही ज्वाला से अनभिञ हूंँ

(किशोर कुणाल)

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

जिन्दगी के पन्ने

कभी सोचता हूँजिन्दगी के कुछ पन्ने खुद लिख पाता
अपनी ही जिन्दगी को खुद समझ पाता
अपने जिन्दगी में कुछ चटपटे ,मनचाहे लम्हे जोर पाता
पता नहीं जिन्दगी में कुछ मजा नहीं
पानी पूरी की तरह चटपटा नहीं
काश ! जिन्दगी का स्वाद मैं कुछ बदल पाता
जिन्दगी के कुछ पन्ने खुद लिख पाता
दुखी नहीं हूँ पर कुछ िखन्न हूँ
भविष्य के लिए अाज से असंतुष्ट हूँ
पता नहीं बहुत साधारण जिन्दगी है
इसमें तो कुछ भी फिल्मी नहीं है
काश! मेरी भी कहानी कुछ तो फिल्मी होती
गजनी सी नहीं लेिकन रब ने बना दी जोङी तो होती
काश! मेरी जिन्दगी कुछ तो फिल्मी होती 8 पैक नहीं तो 6 पैक तो होती
किसी नायिका का मै तो नायक होता
काश! जिन्दगी के कुछ पन्ने मै खुद िलख पाता
चंद लम्हें ईशवर से माँगकर सजाता
जिन्दगी के कुछ पन्ने मै खुद लिख पाता
(किशोर कुणाल)...

बुधवार, 24 अगस्त 2011

भावनाओ की चिता

"""मेरी भावनाओं की चिता मत जलाओ

कभी तो मेरी नजरों का मुसकुराहट से ही जवाव तो देते जाओ

आज मैं मुसफिर हूँ
तेरी राहों का जिसकी मंजिल तूझमें दिखती हैं

मन की उमगों को रोकना अब मेरे बस में नहीं

क्योकि अब तो यह आलम है कि हर सांस तेरी मांग करती है"""
( किशोर कुणाल )