"""मेरी भावनाओं की चिता मत जलाओ
कभी तो मेरी नजरों का मुसकुराहट से ही जवाव तो देते जाओ
आज मैं मुसफिर हूँ
तेरी राहों का जिसकी मंजिल तूझमें दिखती हैं
मन की उमगों को रोकना अब मेरे बस में नहीं
क्योकि अब तो यह आलम है कि हर सांस तेरी मांग करती है"""
( किशोर कुणाल )
कभी तो मेरी नजरों का मुसकुराहट से ही जवाव तो देते जाओ
आज मैं मुसफिर हूँ
तेरी राहों का जिसकी मंजिल तूझमें दिखती हैं
मन की उमगों को रोकना अब मेरे बस में नहीं
क्योकि अब तो यह आलम है कि हर सांस तेरी मांग करती है"""
( किशोर कुणाल )
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