बुधवार, 31 अगस्त 2011

मित्र

कृष्ण और सुदामा के संबध पर जब विचार किया,


सच कहता हूँ मित्र तुम्हारा ही ध्यान किया,नीति


निर्धारण में मैने तुम्हारा साथ पाया,


तन धन से उपर मन का मिलाप पाया,


मित्र हमारे मध्य,


मत भेद तो आया,


लेकिन मन का भेद कभी नहीं आया,


कलयुग में हम भाई जैसा संबध रखते है,


रक्त संबध से सर्वोच्य िवश्वास को स्थान देते है,


मित्र सुख और दुख में हम तुमही को याद करते है,


विश्वास है मुझे,

इस विश्वास के पवित्र बंधन का तुम ख्याल रखोगें,

इस मित्रता के संबध को बहुत ईमानदारी के साथ आगे भी निभाओगें ।
(िकशोर कुणाल)

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