आलोचनाओ ने जीवन के दूसरे पहलू से जो मेरा पहचान करवाया,
परिस्थितिथयों ने जो मेरे स्वाभिमान को कितना चोट पहुँचाया,
प्रत्येक चोट ने दर्द बयां करने की अदा सीखा दिया ,
मुझे बातो की कलाकारी में प्रवीण बना दिया ,
पंगा लेने की प्रबल इच्छा ने भी,
मुझे ""अधिवक्ता"" बना दिया
मुझे ""अधिवक्ता"" बना दिया ....!
(किशोर कुणाल)
परिस्थितिथयों ने जो मेरे स्वाभिमान को कितना चोट पहुँचाया,
प्रत्येक चोट ने दर्द बयां करने की अदा सीखा दिया ,
मुझे बातो की कलाकारी में प्रवीण बना दिया ,
पंगा लेने की प्रबल इच्छा ने भी,
मुझे ""अधिवक्ता"" बना दिया
मुझे ""अधिवक्ता"" बना दिया ....!
(किशोर कुणाल)
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