रविवार, 4 सितंबर 2011

जीवन के प्रति एक दृष्टिकोण

जीवन मे कुछ परिस्थितिया ऐसी होती है जिसमे  आदमी अपने आप को पहचानता है अपना दिशा  निर्धारण  करता है अपनी प्रकृति से समझौता कर अपनी प्रकृति में  भी परिवर्तन लाता है अपनी बुध्दि से विवेक  का निर्माण  करता है।हर कोई जीवन को अपने अनुसार समझता है उसे परिभासित करता है जहाँ तक मेरा प्रशन मै इसे वह सड़क मानता हूँ जिसमे  कई मोड है साथ मे speed breaker भी चाहे जीतनी  धीरे से जाओ झटका लगना ही है।उपर से एक यथेच्छाचारी होने की भी कीमत  चुकानी पड़ती है। कभी कभी शासन की इच्छा अनुशासन भुला देती है।भौतिकी का एक सिधांत  है प्रत्येक तत्व की क्रिया  प्रतिक्रिया   विश्व के हर तत्व से जुड़ा होता है जैसे कही एक तितली  का फरफराना विश्व  के दूसरे कोने मे तुफान की वजह बन सकती है।जीवन पर भी यह सिधांत  सही बैठता है।किसी  अपरिचित का छोटा सा कदम भी किसी  के सफलता असफलता की वजह बन सकती है। इसी तरह अपना एक डर दूसरे को बलवान बनाने के लिए  काफी होता है।

(किशोर  कुणाल)

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