रविवार, 11 सितंबर 2011

"""मैं दिन मे सपने देखने लगा हूँ"""

आज कल रात में नीद नहीं विचार आते है,
सपनो की जगह पर खयाल आते है,
शतरंज की बिसात पर मंत्री बन बैठा हूँ,
अपनी बागडोर भविष्य के हाथ रख छोड़ा हूँ,
पता नहीं क्यों,
मै दिन में सपने देखने लगा हूँ,
खूद अपने आप से लड़ने लगा हूँ,
अपना ही प्रतिव्दन्दी बन बैठा हूँ,
मै दिन में सपने देखने लगा हूँ,
मै दिन में सपने देखने लगा हूँ!!!

(किशोर कुणाल)

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