""""आज हमारे संस्कारो की नीव कमजोर होती जा रही है,
तन पर कपङो के साथ लज्जा कम होती जा रही है,
आज टी. वी देखते समय बाबु जी के सामने नजर नीची नहीं होती,
गलती से भी चैनल चंेज नहीं होती""""
तन पर कपङो के साथ लज्जा कम होती जा रही है,
आज टी. वी देखते समय बाबु जी के सामने नजर नीची नहीं होती,
गलती से भी चैनल चंेज नहीं होती""""
(िकशोर कुणाल)
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