कुणाल तुम सिर्फ एक शब्द बन गए हो ..
सिर्फ चंद अक्षरों की जोड़ तोड़ से बना एक नाम ..
संबोधन का मात्र एक माध्यम..
सुन कर भी किसी के दिल में न तो आग लगती है ..
और न ही गर्व से सीना फुल जाता है और न ही दिलो में जलन होती है किसी को
न ही किसी को कुछ जजबा जगता है
नहीं मुस्कराहट आती है हा ही आसू गिरते है
कुछ तो ऐसा करो
एक परिचय बनो
कुछ अरमानो के , कुछ सपनो के,कुछ ज़ज्बातो के कही इतिहास की गहरे में खो न जाऊ।।।
(किशोर कुणाल)
और न ही गर्व से सीना फुल जाता है और न ही दिलो में जलन होती है किसी को
न ही किसी को कुछ जजबा जगता है
नहीं मुस्कराहट आती है हा ही आसू गिरते है
कुछ तो ऐसा करो
एक परिचय बनो
कुछ अरमानो के , कुछ सपनो के,कुछ ज़ज्बातो के कही इतिहास की गहरे में खो न जाऊ।।।
(किशोर कुणाल)
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