गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

सरजमी


.पाप पूण्य  ,सत्य असत्य गलत सही से परे एक बस्ती है ,
 जँहा  इंसानी और रूहानी  ज़रूरत ही पूरी होती है ,
जँहा एक समान  हवा और पानी रौशनी और ज़मींन है ,
जँहा  कुदरत कोई ना इंसाफी नहीं करता है,
किसी का माकन दुसरे कसे उची नहीं है 
अहम्  गुरुर घमंड की जँहा मौत हो चुकी है,
बस चंद पाक इंसानी ज़ज्बातो का ही सरमाया ,
जँहा खूबसूरती चेहरों में नहीं निगाहों में है,
विश्वाश किसी ताले की मोहताज नहीं है ,
जँहा मज़हब की बात नहीं हुआ करती ,
जँहा सिर्फ मोहबत की खेती हुआ करती है,
मै  अब तक उस  सर जमी के इन्तेजार में  हु ..... .. 
© किशोर कुणाल .............

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