मेरी समस्या बहुत पूरानी है
यह न तो कथा और न कहानी है
कोई बड़ी बात नहीं बस हम तुम की एक छोटी सी जिन्दगानी है
दुख सुख के पल है इसमें
पता नहीं साथ मे थोड़ी प्ेरम कहानी भी है
भावनाओं की उड़ान है इसमें
कुछ अनचाही कुछ अनकही बाते हैं इसमें
यह बात कुछ पूरानी है मेरी समस्या बहुत पूरानी है एक छोटी सी मुलाकात थी किसी से
न ही कोई पूर्व पहचान थी
चिलचलाती धूप बड़ी थी गर्मी की बह दोपहर थी
भीड़ मे मै अकेला था वह अकेली थी
पता नहीं कुछ बात थी
मैं यही सोच रहा था इतने में उसने टोक दिया
मदद की वह गुहार थी
मैं असहज सा और थोड़ा घबराया
पता नहीं क्या बात थी
शायद यह पहली मुलाकात थी
उसने कुछ ऐसा कहा की जो अनकही बात थी
मै कुछ सकपकाया तथा सोच मे पड़ा
फिर देखा सभ्य तथा शिक्षत वह कन्या थी
उसकी समस्या को सुलझाया मैने
जो एक छोटी सी बात थी
बड़े सभ्य तरीके से धन्यवाद कहा उसने
फिर कुछ ऐसा पूछा उसने जो मेरे लिए चौकने वाली बात थी
जो जीवन मे पहली ऐसी परिस्थिती थी
मेरे उत्रर का कुछ देर इन्तेजार के बाद मुस्कुराहट से मेरा धन्यवाद दूसरी बार चुकाने बाद वह चली गयी
उसकी मुस्कुराहट में कुछ तो बात थी
शब्दहीन खड़ा उसके प्रशन का उत्रर ढूढता कुछ देर वही पर खड़ा मैं फिर अपने मंजिल को चला
यह कहानी कुछ पुरानी थी
हम तुम से भरी एक छोटी सी जिन्दगानी थी
मेरी समस्या बहुत पुरानी थी
भुड़सत के पल में यही सोचता हूँ
शब्दहीन खड़ा न रह कर उसके प्रशन का जबाब देता
मै कम से कम उसका फोन न0 तो लेता मैं
शायद बाद में ही जबाब देता
यही एक मेरी एकाकी थी
हम तुम की एक छोटी सी कहानी थी
मेरी समस्या बहुत पूरानी थी
मेरी समस्या बहुत पूरानी थी
यह न तो कथा और न कहानी है
कोई बड़ी बात नहीं बस हम तुम की एक छोटी सी जिन्दगानी है
दुख सुख के पल है इसमें
पता नहीं साथ मे थोड़ी प्ेरम कहानी भी है
भावनाओं की उड़ान है इसमें
कुछ अनचाही कुछ अनकही बाते हैं इसमें
यह बात कुछ पूरानी है मेरी समस्या बहुत पूरानी है एक छोटी सी मुलाकात थी किसी से
न ही कोई पूर्व पहचान थी
चिलचलाती धूप बड़ी थी गर्मी की बह दोपहर थी
भीड़ मे मै अकेला था वह अकेली थी
पता नहीं कुछ बात थी
मैं यही सोच रहा था इतने में उसने टोक दिया
मदद की वह गुहार थी
मैं असहज सा और थोड़ा घबराया
पता नहीं क्या बात थी
शायद यह पहली मुलाकात थी
उसने कुछ ऐसा कहा की जो अनकही बात थी
मै कुछ सकपकाया तथा सोच मे पड़ा
फिर देखा सभ्य तथा शिक्षत वह कन्या थी
उसकी समस्या को सुलझाया मैने
जो एक छोटी सी बात थी
बड़े सभ्य तरीके से धन्यवाद कहा उसने
फिर कुछ ऐसा पूछा उसने जो मेरे लिए चौकने वाली बात थी
जो जीवन मे पहली ऐसी परिस्थिती थी
मेरे उत्रर का कुछ देर इन्तेजार के बाद मुस्कुराहट से मेरा धन्यवाद दूसरी बार चुकाने बाद वह चली गयी
उसकी मुस्कुराहट में कुछ तो बात थी
शब्दहीन खड़ा उसके प्रशन का उत्रर ढूढता कुछ देर वही पर खड़ा मैं फिर अपने मंजिल को चला
यह कहानी कुछ पुरानी थी
हम तुम से भरी एक छोटी सी जिन्दगानी थी
मेरी समस्या बहुत पुरानी थी
भुड़सत के पल में यही सोचता हूँ
शब्दहीन खड़ा न रह कर उसके प्रशन का जबाब देता
मै कम से कम उसका फोन न0 तो लेता मैं
शायद बाद में ही जबाब देता
यही एक मेरी एकाकी थी
हम तुम की एक छोटी सी कहानी थी
मेरी समस्या बहुत पूरानी थी
मेरी समस्या बहुत पूरानी थी
नहीं लेना तेरा नाम, सरे-आम इस डर से
जवाब देंहटाएंमेरे लेने से तेरा नाम, बदनाम ना हो जाये