रविवार, 24 सितंबर 2017

हिन्दु हूँ मैं

अग्नि में अर्पित हूँ गंगा में तर्पित हूँ
हिन्दु हूँ मैं
अपनी मिट्टी के लिए समर्पित हूँ
आसमान में जलकर मैं
राख बन मिट्टी में मिलता हूँ
गंगा में बहकर मैं सौंधी सौंधी महकता हूँ
कहने को साकार है पर सब कुछ निराकार है
पत्तों से लेकर पर्वत तक का सबका सम्मान है
©किशोर कुणाल

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