अग्नि में अर्पित हूँ गंगा में तर्पित हूँ
हिन्दु हूँ मैं
अपनी मिट्टी के लिए समर्पित हूँ
हिन्दु हूँ मैं
अपनी मिट्टी के लिए समर्पित हूँ
आसमान में जलकर मैं
राख बन मिट्टी में मिलता हूँ
गंगा में बहकर मैं सौंधी सौंधी महकता हूँ
राख बन मिट्टी में मिलता हूँ
गंगा में बहकर मैं सौंधी सौंधी महकता हूँ
कहने को साकार है पर सब कुछ निराकार है
पत्तों से लेकर पर्वत तक का सबका सम्मान है
पत्तों से लेकर पर्वत तक का सबका सम्मान है
©किशोर कुणाल
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