ताज़े ज़ख्मों को पुरानी यादों के धागे से सीते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है
कुछ वख्त तो निकालो दोस्ती के जज्बे को जीते है
हम अपनी तन्हाई में बंद कमरों में कब तलक रोते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है
हम अपनी तन्हाई में बंद कमरों में कब तलक रोते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है
बैठ कर तन्हाई में अपनी अपनी तिश्नगी को पीते है
कुछ देर तो दुनिया से दूर अब अपनी यारी को जीते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है
कुछ देर तो दुनिया से दूर अब अपनी यारी को जीते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है
ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव को मिलते और बाटते है
हम बताएँ ज़िंदगी को कैसे कतरा कतरा काटते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है
हम बताएँ ज़िंदगी को कैसे कतरा कतरा काटते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है
कहने को कौन अब अपना होता है ""कुणाल""
बेमौत मरने से पहले चंद पल तो ख़ुशी के जीते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है ।।।
®©किशोर कुणाल
बेमौत मरने से पहले चंद पल तो ख़ुशी के जीते है
चल न मेरे दोस्त तेरे कांधे पर सर रख कर रोते है ।।।
®©किशोर कुणाल
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