सब समझ लेती हो मग़र जज़्बात नहीं समझती
तुम खुदगर्ज़ हो कि मेरे हालात नहीं समझती
तुम खुदगर्ज़ हो कि मेरे हालात नहीं समझती
में ऐसा कभी नहीं था जो हुआ हूँ अभी
तुम मेरे जख्मों का ईलाज नहीं समझती
तुम मेरे जख्मों का ईलाज नहीं समझती
मन तो करता है कि लगा दूँ दुनिया में आग
तुम मेरे दिल के अँगार नहीं समझती
तुम मेरे दिल के अँगार नहीं समझती
तुम नहीं जाती तो ऐसा कभी नहीं होता
तुम बेवफ़ा हो जो इश्क़ के इम्तिहाँ नहीं समझती
तुम बेवफ़ा हो जो इश्क़ के इम्तिहाँ नहीं समझती
स्कूल में मिली थी मुझकों वो कॉलेज में मिल कर खो गयी
दिन तो समझ चुकि थी मेरी मग़र मेरी रात नहीं समझती
दिन तो समझ चुकि थी मेरी मग़र मेरी रात नहीं समझती
मेरे कुछ सवालात है जो मरने से पहले पूछ ही लूँगा तुमसे
मेरे अंदाज को समझती हो न मग़र इन्तेक़ाम नहीं समझती
मेरे अंदाज को समझती हो न मग़र इन्तेक़ाम नहीं समझती
सब कुछ लिहाज़ के दायरे में ही रहे तो ही अच्छा है
तुम साँसे समझ लेती थी मग़र सैलाब नहीं समझती
तुम साँसे समझ लेती थी मग़र सैलाब नहीं समझती
शायरी तो समझ लेती हो तुम मग़र शायर को नहीं समझती
अल्फ़ाज तो समझ लेती हो तुम मग़र जज़्बात नहीं समझती।।।।
©किशोर कुणाल
अल्फ़ाज तो समझ लेती हो तुम मग़र जज़्बात नहीं समझती।।।।
©किशोर कुणाल
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