ज़हर की शीशी में मैं दवा ख़ास रखता हूँ
मालूम नहीं क्यों ऐसे ख्यालात रखता हूँ
मालूम नहीं क्यों ऐसे ख्यालात रखता हूँ
अपने कमरे में अंधेरा कुछ ख़ास रखता हूँ
अंदर की रौशनी की जो तलाश रखता हूँ
अंदर की रौशनी की जो तलाश रखता हूँ
मुझकों मालूम नही ये घर क्यों खाली है मेरा
इसलिए दरों दीवार को चमकदार रखता हूँ
इसलिए दरों दीवार को चमकदार रखता हूँ
ख़ुद से इन्तेक़ाम का हर समान रखता हूँ "कुणाल"
इसलिए कागज़ क़लम दवात अपने पास रखता हूँ।।।
"©किशोर कुणाल
इसलिए कागज़ क़लम दवात अपने पास रखता हूँ।।।
"©किशोर कुणाल
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