रविवार, 24 सितंबर 2017

ज़हर की शीशी में मैं दवा ख़ास रखता हूँ

ज़हर की शीशी में मैं दवा ख़ास रखता हूँ
मालूम नहीं क्यों ऐसे ख्यालात रखता हूँ
अपने कमरे में अंधेरा कुछ ख़ास रखता हूँ
अंदर की रौशनी की जो तलाश रखता हूँ
मुझकों मालूम नही ये घर क्यों खाली है मेरा
इसलिए दरों दीवार को चमकदार रखता हूँ
ख़ुद से इन्तेक़ाम का हर समान रखता हूँ "कुणाल"
इसलिए कागज़ क़लम दवात अपने पास रखता हूँ।।।
"©किशोर कुणाल

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