वख़्त हर जख़्म का एक जबाब रखता है
जख़्म की निशानी अपने पास रखता है
जख़्म की निशानी अपने पास रखता है
पसीने की कमा कर खाने वाला ख़ुद्दार
अपनी आवाज बुलंद सरेआम रखता है
अपनी आवाज बुलंद सरेआम रखता है
जिसको कहता रहा मुझपे ऐतबार कर
वो हर इल्ज़ाम मुझपर तैयार रखता है
वो हर इल्ज़ाम मुझपर तैयार रखता है
है ऐसे भी ख़ुशनसीब जो कभी उलझे नहीं इश्क़ में
"कुणाल" वो है जो सबके दिल पर एख़्तियार रखता है ।।
©किशोर कुणाल
"कुणाल" वो है जो सबके दिल पर एख़्तियार रखता है ।।
©किशोर कुणाल
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