कैसे कर दी ऐसे वख़्त में उसने ईमानदारी की बात
नहीं जानता था शायद भूख क्या है
नहीं जानता था शायद भूख क्या है
बेटी की शादी कर दी उसने पुरखों की जमीन बेच कर
नहीं समझा था वो बाप समाज का दस्तूर क्या है
नहीं समझा था वो बाप समाज का दस्तूर क्या है
मोहब्बत में कर दी उसने चाँद तारे तोड़ लाने की बात "कुणाल"
नहीं समझा इश्क़ का अंधा, मर्द की जुबान क्या है
नहीं समझा इश्क़ का अंधा, मर्द की जुबान क्या है
गरीब की बेटी जल गयी दहेज़ की आग में "कुणाल"
नहीं समझा वो बाप मुफ़लिसी का अंजाम क्या है
नहीं समझा वो बाप मुफ़लिसी का अंजाम क्या है
वो मासूम नहीं समझी जवानी और बचपन का फर्क
किसी ने नहीं बताया उसको कि उस मोड़ पर दरिंदा बैठा है
किसी ने नहीं बताया उसको कि उस मोड़ पर दरिंदा बैठा है
नीति खोजती है जनता राजनीति में "कुणाल"
नहीं समझती है जनता गठबंधन की सरकार क्या है
नहीं समझती है जनता गठबंधन की सरकार क्या है
मेहनत खोजती है वक़ालत मेरी उम्मीद से ज्यादा
नहीं जनता था "कुणाल" धुप में नंगे पाँव चलना क्या है
©किशोर कुणाल।।।
नहीं जनता था "कुणाल" धुप में नंगे पाँव चलना क्या है
©किशोर कुणाल।।।
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