सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

कैसे कर दी ऐसे वख़्त में उसने ईमानदारी की बात

कैसे कर दी ऐसे वख़्त में उसने ईमानदारी की बात
नहीं जानता था शायद भूख क्या है
बेटी की शादी कर दी उसने पुरखों की जमीन बेच कर
नहीं समझा था वो बाप समाज का दस्तूर क्या है
मोहब्बत में कर दी उसने चाँद तारे तोड़ लाने की बात "कुणाल"
नहीं समझा इश्क़ का अंधा, मर्द की जुबान क्या है
गरीब की बेटी जल गयी दहेज़ की आग में "कुणाल"
नहीं समझा वो बाप मुफ़लिसी का अंजाम क्या है
वो मासूम नहीं समझी जवानी और बचपन का फर्क
किसी ने नहीं बताया उसको कि उस मोड़ पर दरिंदा बैठा है
नीति खोजती है जनता राजनीति में "कुणाल"
नहीं समझती है जनता गठबंधन की सरकार क्या है
मेहनत खोजती है वक़ालत मेरी उम्मीद से ज्यादा
नहीं जनता था "कुणाल" धुप में नंगे पाँव चलना क्या है
©किशोर कुणाल।।।

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