मैं ज़िगर में खून को गर्म रखता हूँ
सरेआम सच बोलने का माद्दा भी रखता हूँ
सरेआम सच बोलने का माद्दा भी रखता हूँ
तेरे हर लफ़्ज के हर फर्क को समझता हूँ
तेरे हर लहज़े को मद्देनज़र रखता हूँ
तेरे हर लहज़े को मद्देनज़र रखता हूँ
एक नज़र मंदिर पर तो एक नज़र मस्ज़िद पर रखता हूँ
मैं अपने घर में गीता के साथ क़ुरान भी रखता हूँ
मैं अपने घर में गीता के साथ क़ुरान भी रखता हूँ
दिल में अग़र बग़ावत है तो मोहबत भी रखता हूँ
मैं तेरा दिया हुआ गुलाब आज भी अपनी किताब में रखता हूँ
मैं तेरा दिया हुआ गुलाब आज भी अपनी किताब में रखता हूँ
माना शाहजहाँ नहीं तू इस हिंदुस्तान का "कुणाल",
कोई जान लूटा कर देख एक ताज महल बनाने की हिम्मत भी रखता हूँ।।।
©किशोर कुणाल।।।।
कोई जान लूटा कर देख एक ताज महल बनाने की हिम्मत भी रखता हूँ।।।
©किशोर कुणाल।।।।
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