जैसे मन है मेरा वैसा संग चाहिए
प्रीत में रचा बसा एक चमन चाहिए
प्रीत में रचा बसा एक चमन चाहिए
पीर का समंदर तुम्हारे अंदर बसा
मेरे आँखों को भी अब अश्क चाहिए
मेरे आँखों को भी अब अश्क चाहिए
जीतना उलझा हूँ अब सुलझना चाहिए
तुम्हारे हाथों से हर गाँठ खुलनी चाहिए
तुम्हारे हाथों से हर गाँठ खुलनी चाहिए
सारे कांटे अब चुन लेगें एक एक करके हम
मेरे साथ चलने को तुम्हारा हौसला चाहिए
मेरे साथ चलने को तुम्हारा हौसला चाहिए
"कुणाल" मुश्किलों में चलेंगे हर कदम हर कदम
एक कदम एक कदम चलने को हसफर चाहिए
©किशोर कुणाल।।
एक कदम एक कदम चलने को हसफर चाहिए
©किशोर कुणाल।।
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