अपने आस पास हर शख्स से उकता चूका हूँ
कुछ दोस्त हैं और कुछ दुश्मन है सबको आजमा चूका हूँ
खुदगर्ज़ी में उलझा बेखुद बेबाक सा हूँ
बेरहम बेतरतीब बेशर्म सी ज़िंदगी
कभी फ़क़ीरी तो कभी अमीरी अपनी परछाईं में खोयी खोयी सी जिंदगी
©किशोर कुणाल
कुछ दोस्त हैं और कुछ दुश्मन है सबको आजमा चूका हूँ
खुदगर्ज़ी में उलझा बेखुद बेबाक सा हूँ
बेरहम बेतरतीब बेशर्म सी ज़िंदगी
कभी फ़क़ीरी तो कभी अमीरी अपनी परछाईं में खोयी खोयी सी जिंदगी
©किशोर कुणाल
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