सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

ज़ख़्मी विचारों पर कोई उपचार नहीं लिखता.....!!

ज़ख़्मी विचारों पर कोई उपचार नहीं लिखता.....!!
मैं कितना विप्लवित हूँ मेरे संघर्षों पर कोई इतिहास नहीं लिखता...!!
बहुत कुछ घटता है अदभुत "कुणाल" तेरी ज़िन्दगी के रंगालय में..!!
मुझपर लिखने वाला कभी तुलसीदास नहीं मिलता तो कभी कालिदास नहीं मिलता...!!
जानें कैसे किसी को मीरा कभी किसी को झूठा खिलाने वाली सबरी मिल जाती है..!!
मुझे तो "कुणाल" कभी समर्पण से देख सके चाँद को देखने वाला चकोर नहीं मिलता।।
©किशोर कुणाल।।

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