सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

ज़िन्दगी में मज़े लेना हो तो थोड़ी जोख़िम उठाया करों

ज़िन्दगी में मज़े लेना हो तो थोड़ी जोख़िम उठाया करों
अग़र मोहब्बत पाना है तो शायर से नजदीकियाँ बढ़ाया करो
यहाँ दिल, दर्द, जख़्म, दवा, आरज़ू , ख़्वाब जाने क्या क्या है
अग़र ज़िन्दगी का लुफ्त उठाना हो तो थोड़ी तालुकात बढ़ाया करो
रात का तिलस्म टूट गया, उगता सूरज निखर गया
अग़र सपने सच कर के दिखाना हो तो थोड़ी जल्दी उठ जाया करो
तूफ़ानों में कस्ती छोड़ो तैर कर पार करो
अग़र जवानी में कहानी लिखनी है तो इश्क का कारोबार करो
कत्थई आँखो की गहराई कुछ अलग होती है जनाब
अगर जज़्बातों को समझना है तो "कुणाल" के नज्मो को पढ़ा करो
©किशोर कुणाल

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें