खुलेआम मुझको जो बदनाम करता है
हर जगह मशहूर मेरा नाम करता है
हर जगह मशहूर मेरा नाम करता है
मेरे काम को ख़राब हर बार कहता है
वो जानता नहीं मेरा प्रचार सरेआम करता है
वो जानता नहीं मेरा प्रचार सरेआम करता है
मुझपर खड़े वो कितने सवाल करता है
हर बार मुँह तोड़ उसको जबाब मिलता है
हर बार मुँह तोड़ उसको जबाब मिलता है
सबकों खुश कर पाना नामुमकिन है "कुणाल"
ईट का जबाब पत्थर से देने को तैयार रखता है।।
©किशोर कुणाल
ईट का जबाब पत्थर से देने को तैयार रखता है।।
©किशोर कुणाल
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें