गर्म रोटी की खुशबु जिन्हें पागल कर देती है
मासूम बच्चों की बौखलायी भूख, ये सही नही
मासूम बच्चों की बौखलायी भूख, ये सही नही
चुनावी मौसम में मज़हबी तानों की बारिश
मेरे मुल्क में दंगो के हालात, ये सही नही
मेरे मुल्क में दंगो के हालात, ये सही नही
कहते हो तुम की मेरा चाल चलन ठीक नहीं
कैसे समझाऊ जलन तुम्हारी, ये सही नहीं
कैसे समझाऊ जलन तुम्हारी, ये सही नहीं
भारी बारिश और मिट्टी का बदन "कुणाल"
शमशान में अधजली लाश,ये सही नहीं
शमशान में अधजली लाश,ये सही नहीं
©किशोर कुणाल
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें