"कुणाल" चिराग़ चाहिए सिर्फ रौशनी के लिए
एक दीपक काफ़ी है दीवाली के लिए
एक दीपक काफ़ी है दीवाली के लिए
मुस्कान चाहिए चेहरे पर रौनक के लिए
सादगी काफी है तुम्हारी खूबसूरती के लिए
सादगी काफी है तुम्हारी खूबसूरती के लिए
बस हमसफ़र चाहिये जिंदगी के लिए
इक मुसाफ़िर भी काफ़ी है हुजूम के लिए
इक मुसाफ़िर भी काफ़ी है हुजूम के लिए
©किशोर कुणाल
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