दिल दर्द का टुकड़ा है जिसका मरहम नहीं मिलता,
खुला जख़्म है जो कभी नहीं भरता,
खुला जख़्म है जो कभी नहीं भरता,
गहरा घाव लगा मन में, वो पस नहीं निकलता,
एक जवालामुखी सा है हर लम्हा जो दहकता
एक जवालामुखी सा है हर लम्हा जो दहकता
मेरी सफ़ीना (नाव)फ़सी तूफ़ानों में, उसका किनारा नहीं मिलता,
एक बंद गली सी है जो राह आगे नहीं निकलता
एक बंद गली सी है जो राह आगे नहीं निकलता
तुमसे दर्द मिला मुझकों, उसका एहसान नहीं चुकता
एक तस्वीर बनाता हूँ, जिसका चेहरा नहीं मिलता
एक तस्वीर बनाता हूँ, जिसका चेहरा नहीं मिलता
वो तक़लीफ़ जमी है बर्फ में, वो लम्हा नहीं पिघलता
"कुणाल" लाख ठिठुरता रहूँ, उसको फर्क नहीं पड़ता ।।
© किशोर कुणाल
"कुणाल" लाख ठिठुरता रहूँ, उसको फर्क नहीं पड़ता ।।
© किशोर कुणाल
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