मैंकायस्थो के वंश का अंश हूँ
लेखनी मेरी प्रकृति है
काव्य मेरी आत्मा
बुद्धि मेरी जीविका
कर्म मेराधर्म
और धर्म मेरा अस्तित्व है।
मैंकायस्थ कुल का उद्भव हूँ
संघर्ष मेरी एक मात्र विराशत है
विवेक मेरी कुल सम्पदा
अभिव्यक्ति मेरी पहचान
ज्ञान मेरास्वाभिमान
और स्वाभिमान मेरे लिए स्वाधीनताहै।
मैंचरित्रों में चित्रांश हूँ
मैंयर्थाथ के युद्ध का योद्धा
मैंकुरु के राष्ट्र का ऋणी
मैंकाव्यकृति "कुणाल" हूँ।
© किशोर कुणाल ।।
लेखनी मेरी प्रकृति है
काव्य मेरी आत्मा
बुद्धि मेरी जीविका
कर्म मेराधर्म
और धर्म मेरा अस्तित्व है।
मैंकायस्थ कुल का उद्भव हूँ
संघर्ष मेरी एक मात्र विराशत है
विवेक मेरी कुल सम्पदा
अभिव्यक्ति मेरी पहचान
ज्ञान मेरास्वाभिमान
और स्वाभिमान मेरे लिए स्वाधीनताहै।
मैंचरित्रों में चित्रांश हूँ
मैंयर्थाथ के युद्ध का योद्धा
मैंकुरु के राष्ट्र का ऋणी
मैंकाव्यकृति "कुणाल" हूँ।
© किशोर कुणाल ।।
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