समंदर भी जिसकी तलाश में रहे
वो कतरा अपनी पहचान रखता है
वो कतरा अपनी पहचान रखता है
लहू के एक क़तरे का नाम है इंसान
जो गिरगिट से भी ज्यादा रंग बदलता है
जो गिरगिट से भी ज्यादा रंग बदलता है
एक लफ़्ज में सिमटी परी है कहानी
वो मत्ला ग़ज़ल की बुनियाद रखता है
वो मत्ला ग़ज़ल की बुनियाद रखता है
तुम में जो सिमटी परी है सादगी
सौंदर्य भी एक अलग अल्फ़ाज रखता है
सौंदर्य भी एक अलग अल्फ़ाज रखता है
चन्द जज्बातों की भेंट चढ़ी पत्तियाँ
वो मेहबूब के हाथों पर हीना रखता है
वो मेहबूब के हाथों पर हीना रखता है
पूरी दुनिया ही फरेबी है 'कुणाल'
हर हक़ीक़त जो अपनी छुपाकर रखता है ।।
© किशोर कुणाल
हर हक़ीक़त जो अपनी छुपाकर रखता है ।।
© किशोर कुणाल
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